
एक छोटे से गाँव में मोहन का परिवार रहता था। परिवार में मोहन, उसकी पत्नी सीमा, उनका बेटा आरव और बेटी अनाया थे। मोहन एक छोटी-सी दुकान चलाता था। उसकी आमदनी बहुत ज्यादा नहीं थी, लेकिन वह अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा और अच्छे संस्कार देना चाहता था।
मोहन हमेशा अपने बच्चों से कहता था, “बेटा, जिंदगी में पैसा कम होना कोई बड़ी बात नहीं है। बड़ी बात यह है कि हमारे अंदर मेहनत करने और आगे बढ़ने की इच्छा होनी चाहिए।”
आरव पढ़ाई में बहुत अच्छा था, लेकिन उसे एक समस्या थी। जब भी उसे कोई कठिन सवाल मिलता, वह तुरंत निराश हो जाता और कहता, “मुझसे नहीं होगा।”
एक दिन स्कूल में घोषणा हुई कि जिले में विज्ञान की एक प्रतियोगिता होने वाली है। प्रतियोगिता में जीतने वाले बच्चे को छात्रवृत्ति और पुरस्कार मिलने वाला था।
आरव ने प्रतियोगिता में भाग लेने का फैसला किया। उसने घर आकर अपनी माँ से कहा, “माँ, मैं प्रतियोगिता जीतना चाहता हूँ, लेकिन मुझे डर लग रहा है। अगर मैं हार गया तो?”
माँ ने उसके सिर पर हाथ रखते हुए कहा, “बेटा, हारने से मत डरना। कोशिश न करने से डरना। जीत केवल पुरस्कार पाने का नाम नहीं है। जीत का मतलब है कि तुमने अपनी पूरी मेहनत की।”
उस दिन से आरव ने तैयारी शुरू कर दी। वह रोज स्कूल से आने के बाद दो घंटे पढ़ता। उसकी छोटी बहन अनाया भी उसके साथ बैठती और उसके मॉडल बनाने में मदद करती। पिता दुकान से लौटने के बाद उसका मॉडल देखते और कहते, “गलती हो तो परेशान मत होना। हर गलती हमें कुछ नया सिखाती है।”
कई दिनों की मेहनत के बाद प्रतियोगिता का दिन आ गया। आरव ने अपने बनाए हुए मॉडल को बहुत आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत किया। लेकिन प्रतियोगिता के दौरान उसके मॉडल में अचानक खराबी आ गई।
आरव कुछ पल के लिए घबरा गया। उसे लगा कि अब वह हार जाएगा। तभी उसे अपनी माँ की बात याद आई—“कोशिश न करने से डरना।”
उसने हिम्मत नहीं छोड़ी। उसने समस्या को ध्यान से देखा और अपने मॉडल को ठीक करने की कोशिश की। कुछ मिनट बाद मॉडल फिर से चलने लगा।
जब परिणाम घोषित हुआ तो आरव को प्रथम पुरस्कार मिला।
आरव खुशी से घर पहुँचा। उसके माता-पिता और बहन ने उसे गले लगा लिया। पिता की आँखों में खुशी के आँसू थे।
मोहन ने कहा, “बेटा, आज तुमने केवल प्रतियोगिता नहीं जीती, बल्कि अपने डर को भी हरा दिया।”
आरव मुस्कुराया और बोला, “पापा, अब मुझे समझ आ गया है कि मुश्किल आने पर रुकना नहीं चाहिए।”
उस दिन के बाद आरव ने जीवन में कभी कठिनाइयों से डरना नहीं सीखा। वह जान गया था कि परिवार का साथ, मेहनत और आत्मविश्वास इंसान को किसी भी मंजिल तक पहुँचा सकता है।

